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भगवान राम की बात करते हैं... लंकाधिपति रावण से चल रहे युद्ध के दौरान लक्ष्मण को इंद्रजित मेघनाद का वध करने भेजा गया था... कुछ उपन्यासों के अनुसार उस समय मेघनाद निहत्था पूजा कर रहा था... क्या इस तरीके से किसी योद्धा का वध करने वाला ‘अच्छा’ कहा जाएगा... लेकिन एक तर्क यहां भी दिया जाता है – ‘बुरे’ को खत्म करने के लिए छल का प्रयोग उचित है...

बहरहाल, रावण की ही एक कथा और – युद्ध से पहले, जब राम समुद्र पर पुल बनाने जा रहे थे, एक यज्ञ करवाया गया... अब कुछ कथाओं के मुताबिक वह यज्ञ करवाने के लिए रावण स्वयं वहां आया और पुरोहित की भूमिका निभाई... यही नहीं, कुछ स्थानों पर ऐसा भी कहा जाता है कि उक्त यज्ञ के लिए रावण अपहृत सीता को भी साथ लेकर आया था, क्योंकि कोई भी विवाहित पुरुष पूजा अथवा यज्ञ की वेदी पर अकेला बैठे, तो मनोरथ सफल नहीं होता... अब ऐसी उदारता दिखाने वाले शत्रु रावण को ‘सिर्फ बुरा’ कैसे कहा जा सकता है...


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