राजद्रोह का आरोप साबित होने के बाद वर्ष 1923 में ही महात्मा गांधी का वकालत करने का लाइसेंस रद्द कर दिया गया था।
बंबई उच्च न्यायालय के निर्माण के इतिहास से जुड़ी एक किताब में खुलासा हुआ है कि तत्कालीन सरकार के आदेश के बाद सात न्यायाधीशों वाली पीठ ने वर्ष 1923 में गांधी जी का लाइसेंस रद्द कर दिया था।
यंग इंडिया में वर्ष 1922 में प्रकाशित अपने लेखों के बाद सजा और दोषसिद्ध होने के चलते 17 जनवरी 1923 को गांधीजी का लाइसेंस रद्द कर दिया गया।
home






