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रायपुर में छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम, 2005 की वापसी तथा इस अधिनियम के तहत गिरफ्तार तमाम निर्दोष लोगों, जैसे डॉ. विनायक सेन, अजय टीजी, साई रेड्डी, आदि, की रिहाई हेतु आयोजित दस दिवसीय उपवास पर एक लेख के माध्यम से छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक एवं साहत्यिकार विश्वरंजन ने टिप्पणी की है कि यदि गांधी आज जीवित होते तो शायद बस्तर के जंगलों में अकेले जा कर माओवादियों से कहते कि, ‘मित्र! हिंसा छोड़ो, जो तुमसे असहमत हैं, उन्हें मारना छोड़ो, हम तुम्हें अब नहीं मारने देंगे. तुम्हे आदिवासियों को मारने के पूर्व हमें मारना पड़ेगा. हम उफ्फ तक नहीं करेंगे. हम हाथ तक नहीं उठाएंगे...

गांधी की ग्राम स्वराज्य व्यवस्था में तो हिंसा व आतंक के तरीकों का इस्तेमाल करने वाली पुलिस व सेना का कोई स्थान हो ही नहीं सकता. वह पुलिस जो आम नागरिकों के लिए दहशत का प्रतीक है को गांधी कभी स्वीकार करते ही नहीं.


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