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किसी भी लेखक के लिए सबसे बड़ी बात यह होती है कि वह अपने जीवन काल में ही लीजेंड बन जाए. हिन्दी पत्रकारिता में प्रभाष जोशी का स्थान भी ऐसा ही है. आने वाले समय में लोगों के लिये यह विश्वास करना कठिन होगा कि कभी प्रभाष जोशी जैसा पत्रकार भी हुआ करता था. पत्रकारिता की ऊंचाई इस बात में है कि वह रचना बन जाए, प्रभाष जी पत्रकारों के बीच रचनाकार थे. – सुप्रसिद्ध पत्रकार राजकिशोर का लेख


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