कहते हैं जननी का कर्ज कभी नहीं चुकाया जा सकता है। हालांकि कलयुग में लोग इस बात को भूलते जा रहे हैं, लेकिन 63 साल के एस हरि दास ने अपने समर्पण से लोगों को एक बार फिर इस हकीकत से रू-ब-रू कराया।
ताउम्र अपनी बीमार मां की सेवा करते रहने वाले हरि ने दो साल पहले तक अपना घर बसाने के बारे में सोचा भी नहीं। हालांकि मां अब नहीं रहीं।
एक बेटे का फर्ज निभाने के बाद आखिरकार दास ने बुधवार को अपनी 50 साल की भांजी के साथ शादी रचा ली।
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