बस कुछ ही दिन शेष बचे हैं अपने गणतंत्र दिवस में। सुबह कड़कड़ाती ठंड होगी, एक छुट्टी होगी, एक नया भाषण होगा, एक...? माफ़ कीजिएगा हज़ारों वायदे होंगें, सफ़ेद कुर्ते होंगें, खाकी वर्दियां होंगीं, थके-हारे बेहद उबाऊ वातावरण में स्कूली बच्चे होंगे जो छुट्टी होने और एक अदद बूंदी के लड्डुओं के लिये बैचैन हो रहे होंगे लेकिन... इसके आगे एक और हिन्दुस्तान भी होगा जिसका पेट अभी तक नहीं भरा होगा। टी.वी. क्या है उसे नहीं मालूम, लेकिन मजबूरी क्या है वो अच्छी तरह जानता है। एक अधखुली आंखों से देखता एक शिशु होगा जो नहीं जानता कि उसने इस मिट्टी में जनम तो ले लिया लेकिन गरीबी उसके साथ बतौर भाग्य बनकर आयी है। एक निराश नौजवान के हाथ में डिग्री उसकी बेबसी पर हंस रही होगी। एक गरीब किसान फ़िर से आत्महत्या कर रहा होगा क्योंकि अन्न उपजाने के लिए धन की ज़रूरत होगी और कर्ज का जिन्न उसे जीने नहीं देता। एक बच्चा सड़क पर हंसते-खेलते नहीं चलता क्योंकि उसके पीछे वहशी और ब्लात्कारी दुनिया पड़ी है। कोई औरत बाजार में बिकने वाली चीज बन चुकी होगी तो कहीं किसी के साथ होने वाली घटना के द्वारा पूरी दुनियां ब्रेकिंग-न्यूज के माध्यम से उसके शरीर का मुआयना कर रही होगी। अपहरण के हज़ारों केस उस दिन थानों में दर्ज होंगे, या कई घरों की ज़िन्दगी की कमाई फ़िरौती के रूप में डूब चुकी होगी।
http://mohalla.blogspot.com/2008/01/58.html
by spencer_911 278 days ago, published 273 days ago (mohalla.blogspot.com)
by spencer_911 278 days ago, published 273 days ago (mohalla.blogspot.com)
Comments
Log in to comment or register here
Voters
Blog
About
RSS
Vote Widgets
Bookmarklet
To Top
The truth that makes men free is for the most part the truth which men prefer not to hear. - Herbert Agar
The truth that makes men free is for the most part the truth which men prefer not to hear. - Herbert Agar
home



