केंद्र सरकार को करारा झटका देते हुए उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को वह कानून रद्द कर दिया जिसमें प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक पी वेणुगोपाल को सेवानिवृत्त करने का प्रावधान था।
वेणुगोपाल के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदास के साथ मतभेद गहराने के बाद इस कानून को अमल में लाया गया था। न्यायमूर्ति तरूण चटर्जी और एचएस बेदी की खंडपीठ वेणुगोपाल की अपील बरकरार रखते हुए कानून रद्द कर दिया। वेणुगोपाल ने याचिका में इस कानून को चुनौती देते हुए कहा था कि यह भेदभावपूर्ण है और उन्हें पद से हटाने के लिए दुर्भावनावश लाया गया है। वेणुगोपाल की दलील थी कि संशोधन का एकमात्र उद्देश्य रामदास के साथ मतभेदों के चलते उन्हें पद से हटाना था।
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